Tuesday, 19 May 2009

जब हम गुरु से मिले

प्यार की सीमा नहीं और प्यार अक्सर होता नहीं .जो प्यार की बातें करते हैं वे सिर्फ़ शारीरिक मिलन की बात को ही प्यार जानते हैं। वास्तव मैं प्यार या जो बच्चा माँ से करता है या जो हम गुरु या भगवन से करते है, वाही सच्चा प्यार है बाकि सब दिखावा है। तो हम बात कर रहे थे प्यार की, यदि प्यार ही करना है तो उससे करो जो सब को प्यार करता है बिना लाग लपेट के और स्वारथ के.वोह जो हमें हर रोज प्यार की नींद सुलाता है और रोटी देता है.हमें हर मुसीबतों से राहत दिलाता है । जीवन को अनंत प्यार की जरूरत है और वोह सिर्फ़ मालिक ही दे सकते है। सच्चा मालिक शिर्फ़ भूका है प्यार का न की पैसों का। हमें तो अनंत आनंद की तलाश है न की छारिक शुख की .